मान और अपमान हमें, सब दौर लगे पागलपन के
कांटे फूल मिले जितने भी, स्वीकारे पूरे मन से
इस दुनिया में कोई न रहा, सब नामी और अनाम गए
पता नहीं सब कहां गए, कुछ सुबह गए कुछ शाम गए...
आज ये पढ़ा अच्छा लगा सो आप तक भेज रहा हूँ
उम्मीद है कि पसंद आएगा
विश्वविद्यालय परिसर का मोहपाश
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आज रविवार को माँ शाकुंभरी विश्वविद्यालय परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। छुट्टी
के दिन मैं अकेला ही था। अपने आवास में बिस्तर पर लेटा हुआ लखनऊ से किसी
समाचार क...
1 day ago


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