मान और अपमान हमें, सब दौर लगे पागलपन के
कांटे फूल मिले जितने भी, स्वीकारे पूरे मन से
इस दुनिया में कोई न रहा, सब नामी और अनाम गए
पता नहीं सब कहां गए, कुछ सुबह गए कुछ शाम गए...
आज ये पढ़ा अच्छा लगा सो आप तक भेज रहा हूँ
उम्मीद है कि पसंद आएगा
पूरन वर्मा की झंझरी
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< गांवदेहात डायरी > तापक्रम चालीस डिग्री छूने लगा है। अब मिट्टी का मटका
लेने का समय आ गया है। बाबू सराय में अमूल दूध वाले महेंद्र सिन्ह जी से
पूछा—“आसपास ...
1 day ago

